नारी  vishal panwar

नारी

vishal panwar

यूँ तो ज़माने ने
तमाम नाम दिए हैं मुझे,
पर इज्जत से कोई नारी पुकारे
तो बेहतर लगेगा।
 

यूँ तो सब बेटा-बेटी एक समान
जैसे अधिकारों को बात करते हैं,
पर पेट में ही जीने का अधिकार ना छीने
तो बेहतर लगेगा।
 

यूँ तो सबको बचपन
शौक से जीने का हक है,
पर मेरा बचपन ही खौफनाक ना हो
तो बेहतर लगेगा।
 

यूँ तो सब कदम से कदम मिलाकर
चलने की बात करते हैं,
पर कदम-कदम पर काबिलियत का इम्तेहान ना ले
तो बेहतर लगेगा।
 

यूँ तो तमाम लोग
शर्म लिहाज की बातें करते हैं,
पर अगर सच में एक दूसरे की माँ बहन की इज़्जत करे
तो बेहतर लगेगा।
 

यूँ तो समाज मुझे अपना समझता है,
पर अबला न समझे
तो बेहतर लगेगा।

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