पोशाक का मान

हर इंसान की तीन ज़रूरत,
रोटी कपड़ा और मकान।
पर कपड़ा करता सरे जग में,
पशु-इंसान का फर्क आसान।।
 

कपड़े से बनती पोशाक,
जो रखे इंसान की साख।
पोशाक है कैसी किसने पहनी,
उस पर होती सबकी आँख।।
 

सफेद कोट तो डॉक्टर पहने,
काला कोट वकील की शान।
थानेदार तो पहनी खाकी,
जिसपर टिकती उसकी आन।।
 

सुन्दर कपड़े राजा पहने,
फटा जो पहने गरीब इंसान।
सफ़ेद जो पहने वह साधु है,
काला जो पहने गलत इंसान।।
 

पोशाक तेरी सदा ही जय हो,
तू ही बढ़ाये आदमी का मान।
मन के अंदर क्या है?किसने देखा?
तुझसे मानो आसली पहचान।।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
771
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com