काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





तुम आयीं

केदारनाथ सिंह

शृंगार रस | आधुनिक काल

 20202  0

तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 14997  0

मैं बनी मधुमास आली

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 9922  0

संध्या के संग लौट आना तुम 

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 12853  0

आप का खत मिला आप का शुक्रिया

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 9488  0

वसंत गीत

गोपाल सिंह नेपाली

शृंगार रस | आधुनिक काल

 8462  0

फूल

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 9543  0

बादल देख डरी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 16041  0

दोहे

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 5097  0

रहीम दोहावली

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 9178  0

ऊधो जो अनेक मन होते

भारतेंदु हरिश्चंद्र

शृंगार रस | आधुनिक काल

 5189  0

आज के बिछुड़े

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4966  0

मंगल विलय

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3284  0

परिचय की गाँठ

त्रिलोचन

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3312  0

तमाम उम्र चला हूँ मगर चला न गया

नक्श लायलपुरी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4913  0

धनिकों के तो धन हैं लाखों

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4413  0

अँचल के ऎँचे चल करती दॄगँचल को

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 2921  0

जाति हुती सखी गोहन में

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 3893  0

सफ़ाई मत देना

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 7784  0

लौट आओ

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4089  0

है यह आजु बसन्त समौ

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 3503  0

खुद को आसान कर रही हो ना

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 5582  0

क्यों इन तारों को उलझाते

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4057  0

मैं प्यासा भृंग जनम भर का 

गोपाल सिंह नेपाली

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4257  0

हम तुम युग युग से ये गीत मिलन का

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3027  0

आयौ जुरि उततें समूह हुरिहारन कौ

जगन्नाथदास 'रत्नाकर'

शृंगार रस | रीतिकाल

 1942  0

आज उनसे पहली मुलाक़ात होगी

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4472  0

पुतरी अतुरीन कहूँ मिलि कै लगि

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2369  0

कमल के फूल

भवानी प्रसाद मिश्र

शृंगार रस | आधुनिक काल

 4507  0

विदा के बाद

सोम ठाकुर

शृंगार रस | आधुनिक काल

 3453  0



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