नमन-ए-इंकलाब  शशांक दुबे

नमन-ए-इंकलाब

शशांक दुबे

आओ याद करें हम उनकी जो आज़ादी के मतवाले थे,
नमन करें हम उन वीरों को जो शेरों सी हिम्मतवाले थे।
 

दिल जिगर साँसे भी जिनकी आज़ादी की दीवानी थी,
अमर हुए बलिदानी उनकी हुई अमर कहानी थी।
 

क्रांति की ज्वाला नस-नस में जिनके बोला करती थी,
देशप्रेम की एक सुगंध सी फ़िज़ा में घोला करती थी।
 

अदम्य साहस से भय खाते ब्रिटिश भी डोला करते थे,
वंदे मातरम् के ये नारे दिन रात ही बोला करते थे।
 

आओ उन वीरों को हम-सब मिल कर ऐसा नमन करें,
परचम ऊँचा हो भारत का, देश में मिल जुल अमन करें।

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