सपने तो सपने हैं  VIMAL KISHORE RANA

सपने तो सपने हैं

VIMAL KISHORE RANA

कभी पंछी बन कर संग उड़े,
कभी आँसू बन कर बह जाएँ,
कभी मन का पंछी बोल पड़े,
कभी विमुख होकर ढल जाएँ।
 

सपने तो सपने हैं ए दिल,
यथार्थ में जी तो हम जानें।
 

लेकर के सप्त सुरों के स्वर,
मन को ले जाए डगर-डगर,
महसूस करो कुछ जीवन को,
बहते-कहते यों इधर-उधर,
यूँ बांह पकड़ कर ले जाएँ,
कहते यूँ, आओ खुशी दिलाएँ।
 

सपने तो सपने हैं ए दिल,
यथार्थ में जी तो हम जानें।
 

सपनों ने कहा, कहीं दूर चलें,
अपनी धुन में, मगरूर चलें,
सपनों की दुनिया में खोकर,
सपनों की दुनिया में बहकर,
रंगीन फिज़ा में चूर चलें।
सपनों ने कहा…
सपनों ने कहा चलो, चलतें हैं,
चल कर कुछ तो बदलते हैं।
सपनों ने कहा…..
सपनों ने अक्सर उकसाया,
पर हमको जीना सिखलाया।
 

सपने तो सपने हैं ए दिल,
यथार्थ में जी तो हम जानें।
 

सपनों के धागों से बुनकर
इक चादर हमने भी ओढ़ी,
सपनों के सहरा में उड़कर
एक विमल आकृति भी उभरी।
सपनों की धुन में ही बहकर,
सपनों की दुनिया में खोकर,
सपनों को अपना पाए नहीं,
सपनों के पग पर ही चल कर।
 

सपने तो सपने हैं ए दिल,
यथार्थ में जी तो हम जानें।
 

ए दिल अगर कोई सपना हो,
ना हो अडिग ये रुकावटें,
बहते प्रवाहित इस वेग को,
जो दें गुलामी की आहटें।
या तो सपने हों साधारण,
ना हों सपने कभी अकारण,
सपनों के तारों को पाकर,
आकाश नहीं पा सकते हो,
सपनों को सीमित ही रखकर,
यथार्थ में तुम जी सकते हो।
 

सपने तो सपने हैं ए दिल,
यथार्थ में जी तो हम जानें।

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