ज़ब्त  Mohanjeet Kukreja

ज़ब्त

Mohanjeet Kukreja

बड़ा नाज़ था हमको अपने ज़ब्त पे कभी…
तेरे हिज्र का सदमा मगर हम सह ना सके !
 

रो कर दिल शायद कुछ हल्का हुआ होता…
अश्कों को ना जाने क्या हुआ बह ना सके !

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