एक क़ता...  Mohanjeet Kukreja

एक क़ता...

Mohanjeet Kukreja

रात-रात भर जैसे अंदर कुछ जलता है,
कोई ख़्याल हसरतों की तरह पलता है।
 

नींद तो आती नहीं तमाम रात हमको,
एक ख़्वाब हर शब छत पर टहलता है।

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