शिक्षक  Anupama Ravindra Singh Thakur

शिक्षक

Anupama Ravindra Singh Thakur

आज जब तेल लाने मैं घाने पर गया,
घूमते बैल को देख
अपने आपको वहाँ खड़ा पाया।
सोचा हे! ईश्वर यह तेरी कैसी माया,
कोल्हू के बैल और शिक्षक में
तुझे जरा भी अंतर नज़र नहीं आया?
दोनों को तूने एक समान ही बनाया।
ईश्वर भी मुस्कुराया और मुझे दिखाया,
अरे मूर्ख शिक्षक! ध्यान से देख
बैल केवल घाने के अतरफ है घूमता,
शिक्षक होकर तुझे कभी बच्चों के,
तो कभी उच्च अधिकारी के,
तो कभी अभिभावक के
अतराफ है घूमना पड़ता।
और तो और
बैल को मौन रहकर
यह सब है करना पड़ता,
तुझे तो मुँह का पिटारा
दिनभर बजाना है पड़ता।
बैल ना करें काम तो
उसे कोडे हैं खाने पड़ते,
तू न करे काम
तो तुझे नौकरी से ही
हाथ धोना पड़ता।
बैल को नहीं कोई
कॉपी है जाँचनी पड़ती,
ना ही परीक्षक बनकर
बच्चों को घूरना पड़ता।
सुनकर ईश्वर की बातें
शिक्षक कश्मकश में पड़ गया,
प्रभु क्या कहना चाहते हो
पल्ले कुछ नहीं पड़ता?
क्या बैलों से निकृष्ट जीवन
एक शिक्षक को है जीना पड़ता?
ईश्वर हुए कुछ गंभीर और शांत
फिर बोले,
चाहे करनी पड़े तुझे बैल की जैसी मशक्कत,
पर तेरी महिमा के आगे है
संपूर्ण संसार नतमस्तक।
गुरु बिना कोई ज्ञान नहीं है पावत
गुरु बिना संसार नहीं है सुहावत,
इसलिए स्वयं को कभी भी
तू बैल कहना मत
ईश्वर से भी पहले
गुरु आप है विराजत।आज जब तेल लाने मैं घाने पर गया,
घूमते बैल को देख
अपने आपको वहाँ खड़ा पाया।
सोचा हे! ईश्वर यह तेरी कैसी माया,
कोल्हू के बैल और शिक्षक में
तुझे जरा भी अंतर नज़र नहीं आया?
दोनों को तूने एक समान ही बनाया।
ईश्वर भी मुस्कुराया और मुझे दिखाया,
अरे मूर्ख शिक्षक! ध्यान से देख
बैल केवल घाने के अतरफ है घूमता,
शिक्षक होकर तुझे कभी बच्चों के,
तो कभी उच्च अधिकारी के,
तो कभी अभिभावक के
अतराफ है घूमना पड़ता।
और तो और
बैल को मौन रहकर
यह सब है करना पड़ता,
तुझे तो मुँह का पिटारा
दिनभर बजाना है पड़ता।
बैल ना करें काम तो
उसे कोडे हैं खाने पड़ते,
तू न करे काम
तो तुझे नौकरी से ही
हाथ धोना पड़ता।
बैल को नहीं कोई
कॉपी है जाँचनी पड़ती,
ना ही परीक्षक बनकर
बच्चों को घूरना पड़ता।
सुनकर ईश्वर की बातें
शिक्षक कश्मकश में पड़ गया,
प्रभु क्या कहना चाहते हो
पल्ले कुछ नहीं पड़ता?
क्या बैलों से निकृष्ट जीवन
एक शिक्षक को है जीना पड़ता?
ईश्वर हुए कुछ गंभीर और शांत
फिर बोले,
चाहे करनी पड़े तुझे बैल की जैसी मशक्कत,
पर तेरी महिमा के आगे है
संपूर्ण संसार नतमस्तक।
गुरु बिना कोई ज्ञान नहीं है पावत
गुरु बिना संसार नहीं है सुहावत,
इसलिए स्वयं को कभी भी
तू बैल कहना मत
ईश्वर से भी पहले
गुरु आप है विराजत।

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