पेड़ राजा  Anupama Ravindra Singh Thakur

पेड़ राजा

Anupama Ravindra Singh Thakur

पाठशाला की इमारत
के पीछे खड़ा
वह नीम का पेड़,
टहनियाँ फैलाकर
यों खड़ा,
जैसे झाँक रहा हो
उन कक्षाओं में
जहाँ मस्ती करते छात्र,
शिक्षा देते अध्यापक,
मस्ती में दौड़ते बच्चे,
इनको निहारता
मन ही मन खुश होता।
सोचता, काश! मैं भी चल पाता,
इनकी तरह बोल पाता,
काटने के लिए मुझे
जब कोई आता
तब मैं भी दौड़ लगा पाता।
तभी एक चिड़िया चहचहाती आई,
ऊँची फुनगी पर बैठी मुस्काई,
मीठे-मीठे फल खाकर हर्षाई।
तभी धरती से,
पेड़ को स्वर दिया सुनाई,
तुमने बाँधा मेरे कणों को
तभी मैं मजबूत हो पाई,
हे पेड़ राजा ! तुमसा परोपकारी नहीं है कोई।
देख चिड़िया की मुस्कान
सुन धरती का स्तुति गान,
पेड़ ने कहा -
सचमुच मैं हूँ बहुत ही भाग्यवान,
मेरा जीवन है ईश्वर का वरदान,
परोपकार करते-करते
दूँगा मैं अपनी जान।

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