बचपन Arun Mishra
बचपन
Arun Mishraयाद है तुम्हें वो बचपन का रोना,
वो बारिश के पानी में नाव डुबोना,
वो छोटे से सपनों में दुनिया सजोना।
वो भैया से लड़ना, वो दीदी से झगड़ना,
छोटी सी चीजों के लिए जिद पर अड़ना,
वो प्लास्टिक का खिलौना
वो छुपने का कोना।
वो अधूरा सा होमवर्क,
वो स्कूल ना जाने का बहाना,
वो मेहमानों के आने पर नज़रें चुराना,
वो मिट्टी की खुशबू, वो बेफिक्रा जमाना,
वो तितली पकड़ना और जुगनू भगाना।
वो पतंग के चक्कर में दूसरे की छत लांघ जाना,
वो रातों की कहानी में पूरा खो जाना,
माँ के आंचल में गुज़रा हर एक जमाना,
याद आता है हर एक फसाना,
क्या याद है तुम्हें वो बचपन का रोना??

