अराजक  DEVENDRA PRATAP VERMA

अराजक

DEVENDRA PRATAP VERMA

किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी,
ठहरो इस हादसे की और भी खबरें आती होंगी।
 

मरने और मारने वालों के अलावा भी कोई था,
कुछ भी स्पष्ट नहीं, कहना भले साफगोई था।
 

इस आग का दीदार तो रोज़ होता है,
फिर नया क्या है जो तू धीरज खोता है।
 

तुझे शौक है देखने का तो देख तमाशा,
माथे पर शिकन क्यों है, क्यों है निराशा!
 

आगे अभी और भी खबरें आएँगी,
मानवता का ह्रास कर दिल देहलाएँगी।
 

इस अराजकता को टोक सकता है,
तू जानता है, तू इसे रोक सकता है।
 

आत्म मुग्ध हो तुम्हें तो बस राज करना है,
हर सुदृढ़ व्यवस्था पर ऐतराज करना है।
 

फिर वर्तमान पर शोक का ये दिखावा क्यों,
तुम्हारे भीतर क्रोध का इतना लावा क्यों!
 

सब्र करो यह तुम्हे भी अपनाएगी,
मौत अपना किरदार ज़रूर निभाएगी।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
383
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com