आरक्षण  Sachin Prakash

आरक्षण

Sachin Prakash

जो जन्म पे ही अधिकार नहीं
तो आरक्षण का आधार है क्या,
जो कर्म से ही बरबाद यहाँ हो
वो आरक्षण से आबाद है क्या।
 

सालों से चल रहा ये खेल
कितनों का ही उद्धार हुआ,
जो पहले से खेले थे खेल
उनका ही बस विस्तार हुआ।
 

जो पैसों के पास कभी थे
वो पैसों के और पास हुए,
जो दूसरों के आस पे कभी थे
वो ही आरक्षण के दास हुए।
 

देशहित में क्या सही है
ये कोई नहीं यहाँ सोचेगा,
सबको चाहिए वोट यहाँ
बस रोटी अपनी सेकेगा।
 

आरक्षण से नौकरी होगी
मगर कौशल कहाँ से आएगा,
आगे बढ़ने के रास्ते होंगे
मगर सोच कहाँ से लाएगा।
 

शिक्षा और कुशलता से ही
असमानता मिट जाएगा,
देश बढ़ेगा सबसे आगे
खुशहाली भी आएगा।

अपने विचार साझा करें




0
ने पसंद किया
92
बार देखा गया

पसंद करें


  परिचय

"मातृभाषा", हिंदी भाषा एवं हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार का एक लघु प्रयास है। "फॉर टुमारो ग्रुप ऑफ़ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग" द्वारा पोषित "मातृभाषा" वेबसाइट एक अव्यवसायिक वेबसाइट है। "मातृभाषा" प्रतिभासम्पन्न बाल साहित्यकारों के लिए एक खुला मंच है जहां वो अपनी साहित्यिक प्रतिभा को सुलभता से मुखर कर सकते हैं।

  Contact Us
  Registered Office

47/202 Ballupur Chowk, GMS Road
Dehradun Uttarakhand, India - 248001.

Tel : + (91) - 7534072808
Mail : info@maatribhasha.com