चलो मन उज्जैन की ओर  VIKAS UPAMANYU

चलो मन उज्जैन की ओर

VIKAS UPAMANYU

चलो मन उज्जैन की ओर,
भक्ति का सागर जहाँ उमड़े है,
शिव-शंभु नाम से भोर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

महाकाल की नगरी में
हर पल शिव का डेरा,
जय जय भोलेनाथ गूँजे
हर भक्त का सवेरा,
ध्यान लगाकर त्रिपुरारी
मन हो जाए चितचोर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

गंगा जल से अभिषेक जहाँ
शिवलिंग पर होता है,
डमरू की गूँज से हर दिल
भोले में खोता है,
भस्मारती का दृश्य निराला
हर भक्त हो विभोर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

शिव शंभु की छाया में
मन निर्मल हो जाए,
भक्ति भाव से हर प्राणी
मोक्ष मार्ग को पाए,
नारायण अब शरण तुम्हारे
कर दो कृपा इस ओर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

काल भैरव के द्वार जहाँ
रक्षा का वचन निभाए,
सिंहासन पर विराजे भोले
भक्तों को सुख दिलाए,
हर हर महादेव गूँजे
हर दिशा हर ओर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

शिवरात्रि का पर्व निराला
भक्तों का संगम होता,
दूध बेलपत्र चढ़ाकर सब
भोले में मन खोता,
ज्योतिर्लिंग की महिमा गाते
हर भक्त हो विभोर,
चलो मन उज्जैन की ओर।
 

त्रिपुरारी का तेज निराला
जग में प्रकाश फैलाए,
भूतभावन भोलेनाथ
हर दु:ख हर ले जाएँ,
शिव कृपा से जीवन सुधरे
हर जन हो चितचोर,
चलो मन उज्जैन की ओर।

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