काव्यशाला - श्रृंगार रस की कविताएं

हिंदी साहित्य के श्रृंगार रस की कालजयी कविताओं का संकलन





भाव भगति है जाकें

सूरदास

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2564  0

अब के सजन सावन में 

आनंद बख़्शी

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1927  0

नई उमरिया प्यासी है

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2002  0

हाय-हाय ये मज़बूरी

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1863  0

मौसम के गाँव 

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2306  0

मधु के दिन मेरे गए बीत

नरेन्द्र शर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1712  0

मोरे ललन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2193  0

दूसरो न कोई

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2315  0

उनकी ख़ैरो-ख़बर नहीं मिलती

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1845  0

हो झालौ दे छे रसिया

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1769  0

कुछ बन जाते हैं

उदय प्रकाश

शृंगार रस | आधुनिक काल

 734  0

न आने की आहट

गुलज़ार

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1824  0

अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार

गोपालदास ‘नीरज’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1964  0

ग्रीषम प्रचंड घाम चंडकर मंडल तें

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1614  0

बसो मोरे नैनन में नंदलाल

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

 2314  0

इन हसीन वादियों से 

संतोषानन्द

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1733  0

मैं तो झोंका हूँ

कुमार विश्वास

शृंगार रस | आधुनिक काल

 2298  0

उर तिमिरमय घर तिमिरमय

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1639  0

भिक्षा

बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1705  0

नयनों के डोरे लाल-गुलाल भरे

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1986  0

आरस सोँ रस सोँ

पद्माकर

शृंगार रस | रीतिकाल

 1454  0

वे मधु दिन

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

 1728  0

कुँजन के कोरे मनु केलिरस बोरे लाल

देव

शृंगार रस | रीतिकाल

 1586  0

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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श्रंगार-सोरठा

रहीम

शृंगार रस | भक्तिकाल

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पूछता क्यों शेष कितनी रात

महादेवी वर्मा

शृंगार रस | आधुनिक काल

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अपनी भीगी हुई पलकों पे सजा लो मुझको

नक्श लायलपुरी

शृंगार रस | आधुनिक काल

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जानत नहिं लगि मैं

महाकवि बिहारीलाल

शृंगार रस | रीतिकाल

 1659  0

प्रभु जी तुम दर्शन बिन

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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बरसै बदरिया सावन की

मीराबाई

शृंगार रस | भक्तिकाल

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