नरेन्द्र शर्मा | मातृभाषा - माँ भारती का श्रृंगार

नरेन्द्र शर्मा

जीवन परिचय

नरेन्द्र शर्मा का जन्म 28 फ़रवरी, 1913 ई. में गांव जहांगीरपुर, परगना ज़ेवर, तहसील खुर्जा ,जिला- बुलंदशहर (उत्तरप्रदेश) में हुआ था। 1931 ई. में इनकी पहली कविता 'चांद' में छपी। शीघ्र ही जागरूक, अध्ययनशील और भावुक कवि नरेन्द्र ने उदीयमान नए कवियों में अपना प्रमुख स्थान बना लिया। लोकप्रियता में इनका मुकाबला हरिवंशराय बच्चन से ही हो सकता था।

1933 ई. में इनकी पहली कहानी प्रयाग के 'दैनिक भारत' में प्रकाशित हुई। 1934 ई. में इन्होंने मैथिलीशरण गुप्त की काव्यकृति 'यशोधरा' की समीक्षा भी लिखी। सन्‌ 1938 ई. में कविवर सुमित्रानंदन पंत ने कुंवर सुरेश सिंह के आर्थिक सहयोग से नए सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक स्पंदनों से युक्त 'रूपाभ' नामक पत्र के संपादन करने का निर्णय लिया। इसके संपादन में सहयोग दिया नरेन्द्र शर्मा ने। भारतीय संस्कृति के प्रमुख ग्रंथ 'रामायण' और 'महाभारत' इनके प्रिय ग्रंथ थे। महाभारत में रुचि होने के कारण ये 'महाभारत' धारावाहिक के निर्माता बी.आर. चोपड़ा के अंतरंग बन गए। इसलिए जब उन्होंने 'महाभारत' धारावाहिक का निर्माण प्रारंभ किया तो नरेन्द्रजी उनके परामर्शदाता बने। उनके जीवन की अंतिम रचना भी 'महाभारत' का यह दोहा ही है : "शंखनाद ने कर दिया, समारोह का अंत, अंत यही ले जाएगा, कुरुक्षेत्र पर्यन्त" । 11 फरवरी, 1989 ई. को ह्‌दय-गति रुक जाने से उनका देहावसान हो गया।

लेखन शैली

नरेन्द्र शर्मा जी ने हिन्दी साहित्य की 23 पुस्तकें लिखकर श्रीवृद्धि की है। जिनमें प्रमुख हैं:- प्रवासी के गीत, मिट्टी और फूल, अग्निशस्य, प्यासा निर्झर, मुठ्ठी बंद रहस्य (कविता-संग्रह) मनोकामिनी, द्रौपदी, उत्तरजय सुवर्णा (प्रबंध काव्य) आधुनिक कवि, लाल निशान (काव्य-संयचन) ज्वाला-परचूनी (कहानी-संग्रह, 1942 में 'कड़वी-मीठी बात' नाम से प्रकाशित) मोहनदास कर्मचंद गांधी:एक प्रेरक जीवनी, सांस्कृतिक संक्राति और संभावना (भाषण)। लगभग 55 फ़िल्मों में 650 गीत एवं 'महाभारत' का पटकथा-लेखन और गीत-रचना।

प्रमुख कृतियाँ
क्रम संख्या कविता का नाम रस लिंक
1

आज के बिछुड़े

शृंगार रस
2

कुछ भी बन बस कायर मत बन

वीर रस
3

तुम रत्न-दीप की रूप-शिखा

शृंगार रस
4

वर्षा मंगल

शांत रस
5

नींद उचट जाती है

अद्भुत रस
6

मेरा मन 

शांत रस
7

ज्योति पर्व : ज्योति वंदना

शांत रस
8

जय जयति भारत भारती

वीर रस
9

सुख-दुख

अद्भुत रस
10

मेरे गीत बड़े हरियाले

अद्भुत रस
11

पलाश

शांत रस
12

लौ लगाती गीत गाती

शृंगार रस
13

मधु के दिन मेरे गए बीत

शृंगार रस
14

चलो हम दोनों चलें वहां

अद्भुत रस
15

हंस माला चल

शांत रस
16

ऐसे हैं सुख सपन हमारे

अद्भुत रस
17

प्रयाग

अद्भुत रस
18

माया 

अद्भुत रस
19

फटा ट्वीड का नया कोट

शृंगार रस
20

आषाढ़

अद्भुत रस
21

युग और मैं

करुण रस
22

नैना दीवाने एक नहीं माने

अद्भुत रस
23

साथी चाँद

शांत रस
24

हर लिया क्यों शैशव नादान

अद्भुत रस
25

तुम भी बोलो, क्या दूँ रानी

शृंगार रस
26

गंगा, बहती हो क्यूँ 

वीभत्स रस
27

सूरज डूब गया बल्ली भर

अद्भुत रस

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