ये कैसा प्यार?  VIKAS UPAMANYU

ये कैसा प्यार?

इस कहानी के माध्यम से हमारे समाज में लड़कियों के प्रति हो रहे गलत व्यवहार को उजागर करने का प्रयत्न किया है

उत्तर-प्रदेश राज्य में एक विनोद नाम का लड़का अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी स्कूली पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद उसके माता-पिता ने उसका दाखिला दिल्ली शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में करा दिया। विनोद ने रहने के लिए एक फ्लैट कॉलेज के पास ही ले लिया। पहले दिन कॉलेज में उसकी मुलाकात रीना नाम की एक लड़की से हुई, धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती हुई, एक समय ऐसा आया कि दोनों अपनी छोटी-छोटी बातों को एक दूसरे से साझा करने लगे। उन लोगों को पता ही नहीं लगा कि कब दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। ये प्यार अब अपने परवान पर था, दोनों ने शादी करने की कसमें खा लीं।

सब कुछ सही चल रहा था, कुछ दिनों बाद विनोद का जन्मदिन आने वाला था तो विनोद ने अपने जन्मदिन की पार्टी अपने फ्लैट पर रखी और पार्टी में केवल रीना को ही बुलाया। सबसे पहले दोनों ने केक काटा और डांस का आनंद लिया। तभी विनोद ने रीना का हाथ पकड़ लिया और उसको स्पर्श करने कि कोशिश करने लगा। ऐसा देखकर रीना ने खुद को विनोद से अलग कर लिया, अब विनोद को थोड़ा गुस्सा आ गया और बोला, "रीना तुम सोच रही हो कि मैं तुम्हारे साथ टाइम पास कर रहा हूँ, अब मैं तुम्हें सिर्फ अपनी पत्नी समझता हूँ और अब मैं तुम्हें कभी नहीं छुऊँगा , ऐसा बोलकर वह अलग बैठ गया। रीना ने जब यह सब देखा तो उसको लगा कि विनोद उसको बहुत प्यार करता है और उसने उसको नाराज़ कर दिया है तो बह बोली, "विनोद मुझे माफ कर दो, मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ, मुझ पर सिर्फ तुम्हारा हक है तुम जो चाहो वो कर सकते हो।" रीना की यह बात सुनकर विनोद अति-उत्त्साहित हो गया और दोनों ने सब कुछ भूल कर एक दूसरे के होने का आनंद लिया।

कुछ दिन बीत जाने के बाद रीना को कुछ अलग सा महसूस हुआ, बाद में चेकअप कराने के बाद पता चला कि बह गर्भवती है। उसने यह बात सबसे पहले विनोद को बताई और कहा कि मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ, मुझसे शादी कर लो। रीना कि यह बात सुनकर उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई, उसने कहा कि तुम पागल हो गयी हो क्या? मैं अभी शादी कैसे कर सकता हूँ, अभी तो मेरा करियर भी नहीं बना है, तुम एक काम करो इस बच्चे को गिरा दो। विनोद की यह बात सुनकर रीना तिलमिला गई और बोली कि एक माँ अपने बच्चे को कैसे मार सकती है, यह बात सुनकर विनोद बोला कि अब फैसला तुम्हें करना है कि ये दूसरे का बच्चा चाहिए या मैं। विनोद की यह बात सुनकर रीना छुब्ध हो गई और एक पल के लिए ऐसा लगा कि उसके शरीर से प्राण निकल गए हों, फिर हिम्मत कर के बोली, "क्या! किसी और का बच्चा? अब ये ही सुनना बाकी रह गया था।" विनोद बोला, "और क्या, जो लड़की शादी से पहले मेरे साथ सम्बन्ध बना सकती है तो किसी और के साथ कैसे नहीं?" विनोद की यह बात सुनकर रीना बोली, "विनोद कुछ तो शर्म करो, तुम ये क्या बोल रहे हो, ये हमारा प्यार है तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो।" विनोद ने रीना से कहा, "आज के बाद मुझसे मिलने कि कोशिश मत करना, तुम्हारा मेरा कोई रिश्ता नहीं, मैं तुम्हारी शक्ल नहीं देखना चाहता हूँ, मै कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतना गिर सकती हो, किसी ओर के बच्चे को मेरा नाम दे रही हो।" विनोद की यह बात सुनकर रीना जोर-जोर से रोने लगी और बोलती रही, "विनोद भगवान से डरो, एक दिन तुम भी किसी बेटी के बाप बनोगे तब शायद मेरे दर्द को समझोगे लेकिन तब तुम अपने आप को माफ नहीं कर पाओगे।"

इतनी बात बोलकर रीना अपने घर वापिस आ गई। इस बात का पता उसके घरवालों को चल गया, अब उसके घरवाले भी उसको घृणा की दृष्टि से देखने लगे और उसके साथ अलग ही व्यवहार करने लगे। रीना अब घुट-घुट कर रहने को मजबूर हो गई। तब रीना के माता-पिता को किसी ने गर्भपात कराने की सलाह दी, उसके माता-पिता ने अस्पताल में अपनी एक पहचान वाली डॉक्टर से मिलकर रीना के गर्भ में पल रहे मासूम बच्चे के भ्रूण का गर्भपात करा दिया। इस समय के दौरान रीना को असह्य पीड़ा को झेलना पड़ा और कुछ दिनों बाद उसकी शादी किसी दूर शहर में कर दी गई और इस तरह विनोद और रीना के प्यार का अध्याय समाप्त हो गया।

लेकिन मेरा सवाल यह है कि उस बच्चे की क्या गलती थी जिसको इस संसार में आने से पहले ही मार दिया गया। गलती दो प्यार करने वालों ने की, फिर सज़ा उस मासूम को किस बात की मिली। क्या रीना इस दर्द को भूल पाई होगी? क्या भगवान विनोद को माफ करेगा?

दोस्तों, मै सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा, ये जो नादान सी लड़कियाँ होती हैं इनको अपनी इज्जत अपनी जान से भी प्यारी होती है, यह लड़कों पर इसलिए भरोसा नहीं करती कि वह बहुत धनी एवं शौर्यवान है, उनको लगता है कि उनकी तरह ही लड़का भी उनसे उसी तरह पवित्र प्यार करता है। लेकिन हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग हैं जो लड़की को केवल उपयोग की वस्तु समझते हैं, उनको इस्तेमाल करके छोड़ देते हैं। वो यह भूल जाते हैं कि वो भी किसी के भाई और बाप बनेंगे।

एक बार इन लड़कियों के बारे में तो सोचो, यह हमारे लिए अपना सब कुछ छोड़ देती हैं, ये बात ध्यान रखो इनकी इज्जत से खिलवाड़ करके हमारी मर्दानगी स्थापित नहीं होती है। मर्द की मर्दानगी उनके व्यवहार, और औरतों के प्रति सम्मान से प्रतीत होती है।

मेरी इस कहानी से मेरे किसी भी भाई-बहन को कोई भी आपत्ति होती है तो मैं उनसे हाथ जोड़कर क्षमा माँगता हूँ। अपना छोटा अनुज समझ कर माफ कर देना लेकिन मेरा विनम्र निवेदन है कि इस बारे एक बार ज़रूर सोचें।

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